मेरी माँ..

by Minakshi vats on February 27, 2014, 12:29:33 PM
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Minakshi vats
Aghaaz ae Shayar
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जब मैं छोटी थी तो मेरी मां सबसे
अच्छी होती थी,
जो करती थी हर ख्वाईश पूरी एसी जादुई
परि होती थी,

आज आ गई हूं इस कामियाबी के जहांन मे,
ना चैन है ना सूकून,
कितनी गर्म तेरी गोद कितनी सुकुन
भरी तेरी लोरी होती थी,

आज भटक भी जाऊ तो कोई साथ नही देता,
तब हर मोड पे थामने को तेरी उंगली होती थी,

कितने साथ इक्कठे किए मैने इन मिठ्ठी जबान
वालो के,

वो कितनी निस्वार्थ तेरी डांट
तेरी गाली होती थी,

जब मैं छोटी होती थी ....

माफ कर देती थी तू जितना भी तकरा लेती तुझसे,
मना लेती थी चाहे जितनी गलती मेरी होती थी,

नही पूछता मॉ कोई निवाला भी इस भीड में,
तेरे तो आधी रात में भी मां हाथो में खीर
होती थी,

जब मैं छोटी...

आज हर सुख है नसीब मुझे इस जहान में,
नही मिलता वो फुलका वो दाल
जो कोरी होती थी,

नही गुम होती इस जहान से लडने की क्षमता मेरी,
तुने जो दी सीख कितनी अनोखी होती थी,

जब मै छोटी..

मिनाक्षी वत्स "निशा"
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amit_prakash_meet
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«Reply #1 on: February 27, 2014, 01:02:25 PM »
वाह....बहुत खुबसूरत ज़ज्बात हैं....माँ ऐसी ही होती है.....
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RAJAN KONDAL
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«Reply #2 on: February 27, 2014, 01:41:38 PM »

जब मैं छोटी थी तो मेरी मां सबसे
अच्छी होती थी,
जो करती थी हर ख्वाईश पूरी एसी जादुई
परि होती थी,

आज आ गई हूं इस कामियाबी के जहांन मे,
ना चैन है ना सूकून,
कितनी गर्म तेरी गोद कितनी सुकुन
भरी तेरी लोरी होती थी,

आज भटक भी जाऊ तो कोई साथ नही देता,
तब हर मोड पे थामने को तेरी उंगली होती थी,

कितने साथ इक्कठे किए मैने इन मिठ्ठी जबान
वालो के,

वो कितनी निस्वार्थ तेरी डांट
तेरी गाली होती थी,

जब मैं छोटी होती थी ....

माफ कर देती थी तू जितना भी तकरा लेती तुझसे,
मना लेती थी चाहे जितनी गलती मेरी होती थी,

नही पूछता मॉ कोई निवाला भी इस भीड में,
तेरे तो आधी रात में भी मां हाथो में खीर
होती थी,

जब मैं छोटी...

आज हर सुख है नसीब मुझे इस जहान में,
नही मिलता वो फुलका वो दाल
जो कोरी होती थी,

नही गुम होती इस जहान से लडने की क्षमता मेरी,
तुने जो दी सीख कितनी अनोखी होती थी,

जब मै छोटी..

मिनाक्षी वत्स "निशा"
Waah waah bahot acha likha hai minakshi ji sach mein maa ka koi jwab nahi yuh he likhty rahiya
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Advo.RavinderaRavi
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«Reply #3 on: February 27, 2014, 02:14:45 PM »

जब मैं छोटी थी तो मेरी मां सबसे
अच्छी होती थी,
जो करती थी हर ख्वाईश पूरी एसी जादुई
परि होती थी,

आज आ गई हूं इस कामियाबी के जहांन मे,
ना चैन है ना सूकून,
कितनी गर्म तेरी गोद कितनी सुकुन
भरी तेरी लोरी होती थी,

आज भटक भी जाऊ तो कोई साथ नही देता,
तब हर मोड पे थामने को तेरी उंगली होती थी,

कितने साथ इक्कठे किए मैने इन मिठ्ठी जबान
वालो के,

वो कितनी निस्वार्थ तेरी डांट
तेरी गाली होती थी,

जब मैं छोटी होती थी ....

माफ कर देती थी तू जितना भी तकरा लेती तुझसे,
मना लेती थी चाहे जितनी गलती मेरी होती थी,

नही पूछता मॉ कोई निवाला भी इस भीड में,
तेरे तो आधी रात में भी मां हाथो में खीर
होती थी,

जब मैं छोटी...

आज हर सुख है नसीब मुझे इस जहान में,
नही मिलता वो फुलका वो दाल
जो कोरी होती थी,

नही गुम होती इस जहान से लडने की क्षमता मेरी,
तुने जो दी सीख कितनी अनोखी होती थी,

जब मै छोटी..

मिनाक्षी वत्स "निशा"
मीनाक्षी जी बहुत खूब.!!
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Minakshi vats
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«Reply #4 on: February 27, 2014, 03:28:38 PM »
आभार आप सभी का happy9
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Dineshkumarjonty
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«Reply #5 on: February 27, 2014, 08:21:03 PM »
Aapki MAMMY BAHUT ACHI HAI AAP BHI KAM NAHI HO..

AAPNE BHI KYA KHOOB LIKHA HAI
ACHA LAGA PARHKAR.....


dinesh kumar........
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